आप अपने बच्चो के भविष्य को लेकर चिंतित है तो हर माता-पिता के लिए बहुत जरूरी है।



आज के आधुनिक जीवन में पढ़ाई हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मेरा आज हर माता पिता से निवेदन है की आप मेरी बात को ध्यान से सुने।
हम सभी अपने बच्चो से बहुत प्यार करते है और उनके भविष्य को लेकर चिंतित रहते है । हम जानते है पढ़ाई पढ़ाई का बडा महत्व है। 
में आप सभी माता-पिता से अनुरोध करना चाहता हु की अपने अपने बच्चो से आप हमेशा सकारात्मक बात करे।
नकारात्मक बात कभी अपने बच्चो से न करे। विशेषकर उनके भविष्य को लेकर और उनकी पढ़ाई को लेकर हमेशा  सकारात्मक सोच के साथ बात करे।
 
जैसे कि - तुमने पढ़ाई नही की तो तू कुछ न कर पाओगे लाइफ खराब कर लोगो डॉक्टर इंजीनियर नही बन पाओगे । कुलमिलाकर बच्चों को उनके भविष्यकाल में जो हुआ ही नही जो अभी है ही नही वह बाते करके डराना। आपको लगता है इससे बच्चे डर जायेगे या वह इससे सिख लेंगे और भविष्य में कुछ अच्छा करेंगे तो आप गलत सोचते है।
इसी नकारात्मक सोच के प्रभाव के कारण बच्चे पिछड़ जाते है। क्योकि वो अपने भविष्य को लेकर डर जाते है और चिंतित रहने लगते है और उसी सोच के साथ पढ़ाई करते है आप सोच सकते है उनकी उस टाइम क्या मनोदशा होती होगी। यह सिर्फ आपकी नकारात्मक सोच की वजह से उनकी मानसिक स्थिति पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
इसके विपरीत आपकी उनको टाइम देना उनकी पढ़ाई में आ रही परेशानियों के बारे में पूछना । वह अच्छे नंबर लाये इसके लिए प्रेरित करना चाहे वह कोई उपहार हो। या कही घूमने ले जाना। इससे बच्चो को प्रेरणा भी मिलेंगे और पढ़ाई के लिए प्रेरित भी होंगे।

इसको और अच्छे से समझाने के लिए में आपको एक छोटी सी कहानी समझाना चाहूँगा। जिससे आपको नकारात्मक पहलू और सकारात्मक पहलू दोनों साफ हो जाएंगे।

मान लीजिये -
आपके भविष्य के ताले की चाभी एक पुरानी हवेली में पड़ी है। आपका बच्चा या आपका पुत्र-पुत्री में से कोई ला सकता है । 
यहां माता-पिता अपने बच्चो को समझा सकते है की भावी/आने वाले भविष्य की चाभी कैसे लानी है याद रहे वह चाभी अपने बच्चो को ही लानी है माता-पिता को नही।
अब हम आते है हमारी कहानी पर। कहानी में ऐसे दो बच्चे और उनके दोने बच्चो के माता-पिता है।

पहले माता-पिता अपने बच्चो को बताते है की पुरानी हवेली है इसमे भूत भी हो सकता है ध्यान रहे । आराम से जाना बहुत से बचकर चाभी जल्दी लेकर आना हमारा भविष्य इसी पर निर्भर करता है। बच्चे के मन में भूत की बात बैठ गयी वह डर गया चाभी लाना तो दूर वह उस हवेली में जाना  तक नही चाहता और जाना चाहता है पर भूत की बात से वह भयभित हो गया जैसे तैसे प्रयास किया पर वह फिर भी उस हवेली से खाली हाथ वापस आ गया क्योकि डर के कारण वह चाभी लेने में असफल हो गया क्योकि उसका दिमाग तो भूत में लगा था अपना ध्यान चाभी पर लगा ही नही पाया।

दूसरे माता-पिता जिसने सिर्फ बच्चे को कहा तुम चाभी लेकर आओ फिर हम तुम्हे हम खिलौने लेकर देंगे।
बच्चा उस खिलोने की चाह में हवेली में जाता है और बड़े जतन के साथ उस चाभी को ढूढ़ता है और चाभी ढूढ़कर ले आता है। क्योकि उसका मस्तिष्क उसके साथ और चाभी ढुढने में लगा रहता है। उसे आखिर चाभी मिलती है।

कहानी का सार-
 बच्चो से हमेशा सकारात्मक सोच के साथ बात करे और सकारात्मक सोच के लिए प्रेरित करे। वह कभी असफल नही होगा। हमारी सोच पर बहुत हद तक निर्भर करता है हमारे बच्चो को भविष्य।

माता-पिता की सोच का प्रभाव उनके पर पड़ता है आपसे निवेदन है की आप अपनी नकारात्मक सोच का प्रभाव अपने बच्चो पर न पड़ने दे।

आपका कीमती समय देने के किये धन्यवाद।

आप किस सोच के व्यक्ति है जानना चाहते है तो आप अगली आने वाली पोस्ट जरूर  यहां पढे।

उम्मीद करता हु आपको पोस्ट पड़कर आनंद आया होगा और अगर आपको लगता है कुछ कमी रह गयी है तो आप आपने सुझाव विचार कमेन्ट बॉक्स में लिखकर जरूर अवगत करवाये। धन्यवाद



 

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